Aadhunik Bharat Ke Divangat Ganitagya
About the book
आधुनिक भारतीय गणितज्ञों के बारे में हिंदी भाषा में कोई अच्छा ग्रंथ तैयार करने का प्रयास किसी विद्वान द्वारा नहीं किया गया। कई वर्ष पहले मैंने अपनी यह इच्छा भारतीय गणित के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. राधाचरण गुप्त से प्रकट की थी। उन्होंने मुझे यह शुभ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी मध्य प्रीति श्रीवास्तव तथा महेश शर्मा द्वारा लिखित ‘भारत के महान् गणितज्ञ’ एवं अनंत व्यवहारे द्वारा लिखित ‘भारतीय गणितज्ञ’ नामक पुस्तकें प्रकाशित हुईं। ये दोनों पुस्तकें इस विषय पर सीमित सामग्री उपलब्ध कराती हैं तथा इनका कालखंड विस्तृत है। मेरा उद्देश्य वैदिक काल से लेकर अब तक भारत भूमि में पैदा हुए सभी महान् गणितज्ञों का परिचय कराना है, परंतु यह एक लंबा प्रोजेक्ट है तथा इस क्षेत्र में रुचि रखनेवाले लोग नाम मात्र के हैं। अतः प्रारंभ में मैंने आधुनिक भारतीय गणितज्ञों के ऊपर ही ध्यान केंद्रित किया। इस कालखंड में गणितज्ञों की एक लंबी सूची बन जाती है। अतः पाठकों की रुचि और पुस्तक के आकार को ध्यान में रखते हुए पुस्तक को खंडों में प्रकाशित करने का विचार सुनिश्चित हुआ। प्रथम खंड में केवल उन्नीसवीं तथा बीसवीं शताब्दी में दिवंगत गणितज्ञों को ही लिया गया है। इस पुस्तक के अंदर उन सभी भारतीय विद्वानों का परिचय है, जिन्होंने विशुद्ध गणित, प्रयुक्त गणित, ज्योतिर्विज्ञान, ज्योतिभौतिकी, सैद्धांतिक भौतिकी, कंप्यूटर या सांख्यिकी के क्षेत्र में कार्य किया है।
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About the Book
आधुनिक भारतीय गणितज्ञों के बारे में हिंदी भाषा में कोई अच्छा ग्रंथ तैयार करने का प्रयास किसी विद्वान द्वारा नहीं किया गया। कई वर्ष पहले मैंने अपनी यह इच्छा भारतीय गणित के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. राधाचरण गुप्त से प्रकट की थी। उन्होंने मुझे यह शुभ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी मध्य प्रीति श्रीवास्तव तथा महेश शर्मा द्वारा लिखित ‘भारत के महान् गणितज्ञ’ एवं अनंत व्यवहारे द्वारा लिखित ‘भारतीय गणितज्ञ’ नामक पुस्तकें प्रकाशित हुईं। ये दोनों पुस्तकें इस विषय पर सीमित सामग्री उपलब्ध कराती हैं तथा इनका कालखंड विस्तृत है। मेरा उद्देश्य वैदिक काल से लेकर अब तक भारत भूमि में पैदा हुए सभी महान् गणितज्ञों का परिचय कराना है, परंतु यह एक लंबा प्रोजेक्ट है तथा इस क्षेत्र में रुचि रखनेवाले लोग नाम मात्र के हैं। अतः प्रारंभ में मैंने आधुनिक भारतीय गणितज्ञों के ऊपर ही ध्यान केंद्रित किया। इस कालखंड में गणितज्ञों की एक लंबी सूची बन जाती है। अतः पाठकों की रुचि और पुस्तक के आकार को ध्यान में रखते हुए पुस्तक को खंडों में प्रकाशित करने का विचार सुनिश्चित हुआ। प्रथम खंड में केवल उन्नीसवीं तथा बीसवीं शताब्दी में दिवंगत गणितज्ञों को ही लिया गया है। इस पुस्तक के अंदर उन सभी भारतीय विद्वानों का परिचय है, जिन्होंने विशुद्ध गणित, प्रयुक्त गणित, ज्योतिर्विज्ञान, ज्योतिभौतिकी, सैद्धांतिक भौतिकी, कंप्यूटर या सांख्यिकी के क्षेत्र में कार्य किया है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 150 grams
- ISBN-13
- 9789392040672
- Pages
- 504
- Reading time
- ~17 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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