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Museum of Goa

Published by

Ektara Trust

In category

Young Adults

Language

Hindi

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About the book

सुबोध केरकर हमारे देश के जाने-माने कलाकार हैं। इन्स्टॉलेशन, स्क्ल्पचर, पेंटिंग तमाम कलाओं में उनकी आवाजाही और काम हैं। गोवा म्यूज़ियम के वे फाउण्डर डाइरेक्टर हैं। इसी म्यूज़ियम की बुनाई की कहानी यह किताब है। इस किताब में गोवा, गोवा का परिवेश, इतिहास, समुद्र है, नारियल हैं। कलाकार का दिल और उसमें उठने वाले सवाल हैं। एक सवाल से एक कलाकार कैसे उलझता है, डूबता है इस बात की सुन्दर कथा है। इसमें गांधी हैं और उनके दिल की धड़कन है। जुगलबन्दी है गोवा और सुबोध क रचनात्मक रिश्ते की। इसके चित्र बच्चों के अपने दिल के करीब के लगेंगे। कई चित्र ऐसे हैं कि उनका विषय बाद में दिखेगा उनकी सरलता पहले दिखेगी। इसलिए किसी को भी ये लग सकता है कि अरे, ये चित्र तो वे भी बना सकते हैं। इस किताब को पढ़के किसका मन गोवा के इस म्यूज़ियम को देखने का नहीं होगा।

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About the Book

सुबोध केरकर हमारे देश के जाने-माने कलाकार हैं। इन्स्टॉलेशन, स्क्ल्पचर, पेंटिंग तमाम कलाओं में उनकी आवाजाही और

काम हैं। गोवा म्यूज़ियम के वे फाउण्डर डाइरेक्टर हैं। इसी म्यूज़ियम की बुनाई की कहानी यह किताब है।
इस किताब में गोवा, गोवा का परिवेश, इतिहास, समुद्र है, नारियल हैं। कलाकार का दिल और उसमें उठने वाले सवाल हैं। एक सवाल से एक कलाकार
कैसे उलझता है, डूबता है इस बात की सुन्दर कथा है। इसमें गांधी हैं और उनके दिल की धड़कन है। जुगलबन्दी है गोवा और सुबोध क रचनात्मक रिश्ते की।
इसके चित्र बच्चों के अपने दिल के करीब के लगेंगे। कई चित्र ऐसे हैं कि उनका विषय बाद में दिखेगा उनकी सरलता पहले दिखेगी। इसलिए किसी को भी
ये लग सकता है कि अरे, ये चित्र तो वे भी बना सकते हैं। इस किताब को पढ़के किसका मन गोवा के इस म्यूज़ियम को देखने का नहीं होगा।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Ektara Trust
Format
Paperback
Publisher
Ektara Trust
Weight
350 grams
ISBN-13
9789349286030
Pages
64
Reading time
~2 hrs
Age
11-18
Country of origin
IN
Dimensions
25 × 25 cm
Language
Hindi

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