Ab Hamen Badalna Hoga

(0)

Author:

N. Raghuraman

Language:

Hindi

Category:

Self-help

₹ 300

240 (20% off)

Unavailable

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


"विगत वर्षों में हमारे अधिकतर आई.टी. कार्यालय निश्चित स्थान पर 9 से 5 के परंपरागत काम के ढर्रे से काफी आगे निकलकर मोबाइल वर्क प्लेस और सुविधानुसार समय तक पहुँच गए हैं। रिक्रूटमेंट और परफॉर्मेंस रेटिंग स्वचालित हो चुके हैं। हाजिरी मोबाइल या हस्तचालित उपकरणों के जरिए होने लगी है। अगर 10 सालों में हम निश्चित स्थान के कार्यस्थल से चलते-फिरते कार्यस्थल तक का सफर तय कर चुके हैं तो कल्पना कीजिए, अगले पाँच सालों में और क्या हो जाएगा! बड़ी कंपनियाँ नई कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा महसूस करने लगी हैं और नई कंपनियाँ कुछ बड़ी सड़कों या मॉल की खुदरा दुकानों की तरह खुल रही हैं। जागने से सोने तक का सबकुछ बदलने ही वाला है और अगर हम इस बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे तो प्रतिस्पर्धा में टिक पाना हमारे लिए कठिन होगा। अत: ऐसे परिवेश में हमें अपने आपको बदलना होगा। क्यों और कैसे बदलना होगा—यह इस पुस्तक में बताया गया है। बदलाव के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सही सोच विकसित करनेवाली एक व्यावहारिक पुस्तक। "

Read more

ISBN
N/A
Pages
160
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Don’t Miss Out

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format:

This Book is out of stock
This Book is out of stock

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

"विगत वर्षों में हमारे अधिकतर आई.टी. कार्यालय निश्चित स्थान पर 9 से 5 के परंपरागत काम के ढर्रे से काफी आगे निकलकर मोबाइल वर्क प्लेस और सुविधानुसार समय तक पहुँच गए हैं। रिक्रूटमेंट और परफॉर्मेंस रेटिंग स्वचालित हो चुके हैं। हाजिरी मोबाइल या हस्तचालित उपकरणों के जरिए होने लगी है। अगर 10 सालों में हम निश्चित स्थान के कार्यस्थल से चलते-फिरते कार्यस्थल तक का सफर तय कर चुके हैं तो कल्पना कीजिए, अगले पाँच सालों में और क्या हो जाएगा! बड़ी कंपनियाँ नई कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा महसूस करने लगी हैं और नई कंपनियाँ कुछ बड़ी सड़कों या मॉल की खुदरा दुकानों की तरह खुल रही हैं। जागने से सोने तक का सबकुछ बदलने ही वाला है और अगर हम इस बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे तो प्रतिस्पर्धा में टिक पाना हमारे लिए कठिन होगा। अत: ऐसे परिवेश में हमें अपने आपको बदलना होगा। क्यों और कैसे बदलना होगा—यह इस पुस्तक में बताया गया है।
बदलाव के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सही सोच विकसित करनेवाली एक व्यावहारिक पुस्तक।
"

Book Details

  • ISBN
    9789351867067
  • Pages
    216
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Ab Hamen Badalna Hoga opens with a startling observation: India's IT offices have moved from fixed 9-to-5 routines to mobile workplaces and flexible hours in just ten years. Recruitment and performance ratings have become automated; attendance is tracked through mobile devices—if this much has changed in a decade, what will the next five years bring? This Hindi self-help book addresses the anxiety felt by professionals across India as traditional work structures collapse and new competitors challenge established companies. Rather than offering platitudes, it grounds itself in the lived reality of Indian workplaces—the shift from physical presence to output-driven models, the threat startups pose to legacy firms, and the personal recalibration required when the rules of career success rewrite themselves mid-game. It is a practical mirror held up to a moment of professional vertigo.

"Ab Hamen Badalna Hoga" किताब पढ़ने पर मुझे कैसा अनुभव होगा?

यह किताब आपको एक चिंतनशील और सजग अनुभव देगी। यह कार्यस्थल में हो रहे तेज़ बदलावों को स्पष्टता से समझाती है और आपको भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में प्रेरित करती है। पढ़ते समय आप महसूस करेंगे कि यह केवल सूचना नहीं, बल्कि आपकी पेशेवर सोच को नया आकार देने का माध्यम है।

"Ab Hamen Badalna Hoga" पुस्तक किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या चाहिए?

  • आई.टी. और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर जो बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं
  • युवा जो करियर की शुरुआत कर रहे हैं और भविष्य की चुनौतियों को समझना चाहते हैं
  • वे पाठक जो भारतीय कार्य संस्कृति के विकास में रुचि रखते हैं
  • हिंदी में आत्म-विकास साहित्य पढ़ने वाले जो व्यावहारिक मार्गदर्शन खोजते हैं

भारतीय पाठकों के लिए इस विषय का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?

भारत में पिछले दस वर्षों में कार्यस्थल संस्कृति में जो क्रांतिकारी परिवर्तन आया है, वह पीढ़ियों की सोच को बदल रहा है। पारंपरिक नौकरी की स्थिरता अब अनिश्चितता में बदल रही है, और स्टार्टअप संस्कृति पुरानी कंपनियों को चुनौती दे रही है। यह किताब उस संक्रमण काल को समझने का माध्यम है जिसमें आज के भारतीय पेशेवर जी रहे हैं।

"Ab Hamen Badalna Hoga" विषय पर लेखक का दृष्टिकोण विशिष्ट किस प्रकार बनाता है?

लेखक ने काल्पनिक सिद्धांतों की बजाय भारतीय आई.टी. और कॉर्पोरेट क्षेत्र में हुए वास्तविक बदलावों को आधार बनाया है। मोबाइल वर्क प्लेस, स्वचालित रिक्रूटमेंट, और लचीले समय जैसे ठोस उदाहरणों के साथ यह समझाया गया है कि अगले पाँच वर्षों में क्या संभव है और हमें कैसे तैयार रहना चाहिए।

"Ab Hamen Badalna Hoga" किताब पढ़कर पाठक के मन में क्या बचता है—भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से?

पाठक के मन में यह समझ बनी रहती है कि बदलाव अपरिहार्य है और उससे डरने की बजाय उसे अपनाना ही बुद्धिमानी है। भावनात्मक रूप से यह साहस देती है, बौद्धिक रूप से यह भविष्य की रणनीति सोचने को प्रेरित करती है, और सांस्कृतिक रूप से यह भारतीय कार्य जगत की नई पहचान को स्वीकार करने का आत्मविश्वास देती है।

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp