🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Sagar Ki Rochak Baaten

Published by

Prabhat Prakashan

In category

Other

Language

Hindi

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

"जब ईश्‍वर ने पृथ्वी बनाई तो उसके दो-तिहाई हिस्से को जल देकर भर दिया । हो सकता है, इसमें उसका कुछ उद‍्देश्य रहा हो; किंतु हम पृथ्वीवासियों के लिए यह बड़े फायदे की बात है । इतना अधिक जल धरती के बाकी सूखे टुकड़े को वातानुकूलित रखता है और हम पृथ्वी पर रहनेवाले जीवित प्राणी सूर्य की गरमी से नष्‍ट होने से बचे रहते हैं । इसके अलावा इतने बड़े जलाशय की आवश्यकता प्रकृति को स्वयं के आसवन उपकरण-सूर्य की सहायता से पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए थी । औसतन एक घन किलोमीटर समुद्री जल में लगभग चार करोड़ दस लाख टन नमक होता है । यह अनुमान लगाया गया है कि संपूर्ण जलमंडल में इतना नमक है, जो पूरे संसार को 150 मीटर मोटी नमक की परत से ढक सकता है । नमक के अलावा समुद्र में दूसरे खनिज भी होते हैं । एक घनमील समुद्र के पानी में पंद्रह करोड़ टन से ज्यादा खनिज होते हैं । उनमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है 'आयोडीन' । दूसरा है ' ब्रोमीन ' । संसार- भर की ब्रोमीन का 9/10 हिस्सा समुद्र में ही होता है । ब्रोमीन का उपयोग फोटोग्राफी की प्लेटों और अनेक दवाओं में होता है । इसके अतिरिक्‍त सागर ओषधियों का भी भंडार है । सागर की ऐसी ही रोचक तथा वैज्ञानिक जानकारी के लिए प्रस्तुत है-' सागर की रोचक बातें '|

Read more

₹ 300

240 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Sagar Ki Rochak Baaten This book ₹240
Antariksh Ki Rochak Baaten S.G. Mishra ₹250
3 books selected ₹950 ₹890

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

"जब ईश्‍वर ने पृथ्वी बनाई तो उसके दो-तिहाई हिस्से को जल देकर भर दिया । हो सकता है, इसमें उसका कुछ उद‍्देश्य रहा हो; किंतु हम पृथ्वीवासियों के लिए यह बड़े फायदे की बात है । इतना अधिक जल धरती के बाकी सूखे टुकड़े को वातानुकूलित रखता है और हम पृथ्वी पर रहनेवाले जीवित प्राणी सूर्य की गरमी से नष्‍ट होने से बचे रहते हैं । इसके अलावा इतने बड़े जलाशय की आवश्यकता प्रकृति को स्वयं के आसवन उपकरण-सूर्य की सहायता से पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए थी ।
औसतन एक घन किलोमीटर समुद्री जल में लगभग चार करोड़ दस लाख टन नमक होता है । यह अनुमान लगाया गया है कि संपूर्ण जलमंडल में इतना नमक है, जो पूरे संसार को 150 मीटर मोटी नमक की परत से ढक सकता है ।
नमक के अलावा समुद्र में दूसरे खनिज भी होते हैं । एक घनमील समुद्र के पानी में पंद्रह करोड़ टन से ज्यादा खनिज होते हैं । उनमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है 'आयोडीन' । दूसरा है ' ब्रोमीन ' । संसार- भर की ब्रोमीन का 9/10 हिस्सा समुद्र में ही होता है । ब्रोमीन का उपयोग फोटोग्राफी की प्लेटों और अनेक दवाओं में होता है । इसके अतिरिक्‍त सागर ओषधियों का भी भंडार है ।
सागर की ऐसी ही रोचक तथा वैज्ञानिक जानकारी के लिए प्रस्तुत है-' सागर की रोचक बातें '|

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
175 grams
ISBN-13
9789387980020
Pages
112
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Sagar Ki Rochak Baaten approaches ocean science not through technical formulas but through theological curiosity—opening with the question of divine intent behind Earth's water-to-land ratio. This Hindi-language work transforms marine biology, oceanography, and climate science into narratives accessible to readers without scientific backgrounds. The book quantifies ocean phenomena in memorable terms: one cubic kilometer of seawater contains approximately 41 million tonnes of matter, yet explains this density through everyday analogies rather than chemistry equations. Published by Prabhat Prakashan, it bridges the gap between India's growing environmental awareness and the scarcity of quality science literature in Hindi. The text explains how oceans function as Earth's climate control system and nature's largest solar distillation apparatus—concepts vital to understanding monsoons, coastal ecosystems, and water security in the Indian subcontinent. Its conversational register makes complex marine systems comprehensible to school students, curious adults, and anyone seeking to understand the blue planet through their mother tongue.

Sagar Ki Rochak Baaten पुस्तक पढ़ने का अनुभव कैसा होगा और यह किस तरह की सोच को प्रोत्साहित करती है?

यह पुस्तक आपको वैज्ञानिक तथ्यों को सरल, बोलचाल की हिंदी में समझाती है, जिससे पढ़ने का अनुभव सहज और रोचक बनता है। यह जटिल समुद्री विज्ञान को धार्मिक और दार्शनिक प्रश्नों से जोड़कर प्रस्तुत करती है, जैसे कि ईश्वर ने पृथ्वी का दो-तिहाई हिस्सा जल से क्यों भरा। पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयुक्त है जो वैज्ञानिक जिज्ञासा रखते हैं लेकिन तकनीकी शब्दावली से बचना चाहते हैं।

Sagar Ki Rochak Baaten पुस्तक किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है, और इसे पढ़ने के लिए किस तरह की पृष्ठभूमि चाहिए?

  • विद्यार्थी जो भूगोल, पर्यावरण विज्ञान या समुद्र विज्ञान में रुचि रखते हैं
  • हिंदी माध्यम के पाठक जो अंग्रेजी विज्ञान साहित्य से परेशान हैं
  • सामान्य पाठक जो प्रकृति और पृथ्वी की कार्यप्रणाली को समझना चाहते हैं
  • शिक्षक जो हिंदी में विज्ञान पढ़ाने के लिए संदर्भ सामग्री खोज रहे हैंपुस्तक

Sagar Ki Rochak Baaten भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या पर्यावरणीय दृष्टि से क्यों प्रासंगिक है?

भारत की लंबी तटरेखा, मानसून पर निर्भरता और जल संकट को देखते हुए, यह पुस्तक समुद्र की भूमिका को जलवायु नियंत्रण और प्राकृतिक आसवन तंत्र के रूप में समझाती है। यह पाठकों को यह समझने में मदद करती है कि समुद्र कैसे सौर ऊर्जा से पीने योग्य जल उपलब्ध कराता है—एक अवधारणा जो भारत के जल प्रबंधन और पर्यावरण जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है।

Sagar Ki Rochak Baaten लेखक का दृष्टिकोण अन्य विज्ञान पुस्तकों से किस प्रकार अलग है?

यह पुस्तक वैज्ञानिक तथ्यों को धार्मिक और दार्शनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है—जैसे ईश्वर के उद्देश्य से शुरुआत करना—जो भारतीय पाठकों के लिए परिचित और आकर्षक है। लेखक तकनीकी आंकड़ों को रोजमर्रा की भाषा में बदलता है, जैसे एक घन किलोमीटर समुद्री जल में चार करोड़ दस लाख टन पदार्थ बताकर। यह शैली विज्ञान को कहानी की तरह सुलभ बनाती है।

Sagar Ki Rochak Baaten पढ़ने के बाद पाठक के मन में कौन-सी बात लंबे समय तक रहती है?

पुस्तक पाठकों को यह एहसास दिलाती है कि पृथ्वी पर जीवन समुद्र के बिना असंभव है—यह केवल जलाशय नहीं, बल्कि जलवायु नियामक और जीवन रक्षक तंत्र है। यह समझ पाठकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की भावना जगाती है। पुस्तक विज्ञान को आध्यात्मिकता से जोड़कर एक गहरा बौद्धिक संतोष प्रदान करती है।

View on Rachnaye →

Offers

Loading offers…

whatsapp