Khuli Daraj Aur Bikhari Khushbuyen

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Author:

Sanjay Jain

Language:

Hindi

Category:

Other

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कहानी अपनी जिजीविषा उस अंतर्द्वंद्व से हासिल करती है, जो विचार और संवेदना के बीच होता है। इस अंतर्द्वंद्व को समझे बिना भ्रम और भटकाव के रास्ते जल्दी से खुलने लगते हैं। सरोकार के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए कहानी में संवेदना जरूरी तत्त्व है। किसी भी कहानी को यदि संवेदना की ममता नहीं मिलती है तो रचना जल्दी से अनाथ होने लगती है। प्रस्तुत कहानी-संग्रह इस अर्थ में उल्लेखनीय है कि रचना में संवेदन उपस्थिति के लिए एक ईमानदार इच्छा तत्पर है। इन कहानियों में सामाजिक लगाव की मौजूदगी के लिए लेखक की व्याकुल निष्ठा निरंतर प्रयत्न करती रहती है। साथ ही यह प्रयत्न कहानी में अनुभव के तनाव के लिए भी जगह बनाता रहता है। 'खुली दराज' संग्रह की कहानियाँ कथा-निष्ठा की कहानियाँ हैं, जो हर आयु वर्ग के पाठक के लिए मनोरंजक व ज्ञानवर्धक ही नहीं, संग्रहणीय भी हैं ।

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ISBN
9789395386180
Pages
152
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

कहानी अपनी जिजीविषा उस अंतर्द्वंद्व से हासिल करती है, जो विचार और संवेदना के बीच होता है। इस अंतर्द्वंद्व को समझे बिना भ्रम और भटकाव के रास्ते जल्दी से खुलने लगते हैं। सरोकार के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए कहानी में संवेदना जरूरी तत्त्व है। किसी भी कहानी को यदि संवेदना की ममता नहीं मिलती है तो रचना जल्दी से अनाथ होने लगती है।


प्रस्तुत कहानी-संग्रह इस अर्थ में उल्लेखनीय है कि रचना में संवेदन उपस्थिति के लिए एक ईमानदार इच्छा तत्पर है। इन कहानियों में सामाजिक लगाव की मौजूदगी के लिए लेखक की व्याकुल निष्ठा निरंतर प्रयत्न करती रहती है। साथ ही यह प्रयत्न कहानी में अनुभव के तनाव के लिए भी जगह बनाता रहता है।


'खुली दराज' संग्रह की कहानियाँ कथा-निष्ठा की कहानियाँ हैं, जो हर आयु वर्ग के पाठक के लिए मनोरंजक व ज्ञानवर्धक ही नहीं, संग्रहणीय भी हैं ।

Book Details

  • ISBN
    9789395386180
  • Pages
    152
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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