Kalam Ka Bachapan
(0)
₹
125
₹ 100 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जाने-माने वैज्ञानिकों में से थे; परंतु वे एक व्यक्ति, भारत के राष्ट्रपति तथा एक अध्यापक के रूप में और भी अधिक उल्लेखनीय रहे हैं। वे अपने शब्दों और कर्मों से लोगों को इस तरह मंत्रमुग्ध करते आए थे कि सबके प्रिय पात्र बन गए। उनके महान् व्यक्तित्व को जितना सराहा जाता है, शायद ही कोई और ऐसा व्यक्तित्व होगा, जिसे इतना स्नेह और प्रशंसा मिली होगी। यह पुस्तक उनके प्रेरक व्यक्तित्व के प्रति श्रद्धासुमन स्वरूप समर्पित है। इसमें उनके बाल्यकाल और युवावस्था से जुड़े अनेक रोचक व प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत हैं, जिनमें से अनेक बिल्कुल अनजाने हैं और इन्होंने उनके महान् व्यक्तित्व को गढ़ने में सहायता की। इस पुस्तक में दिए चित्रों के माध्यम से पाठक उनके जीवन और कार्यों का जीवंत अनुभव पा सकते हैं। इन प्रसंगों को जिस तरह पुस्तक के आकार में पिरोया है, वह निश्चित रूप से सबके लिए पे्ररणादायी है। डॉ. कलाम के प्रेरणाप्रद यशस्वी जीवन का दिग्दर्शन कराती अत्यंत पठनीय पुस्तक। "
Read moreAbout the Book
"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जाने-माने वैज्ञानिकों में से थे; परंतु वे एक व्यक्ति, भारत के राष्ट्रपति तथा एक अध्यापक के रूप में और भी अधिक उल्लेखनीय रहे हैं। वे अपने शब्दों और कर्मों से लोगों को इस तरह मंत्रमुग्ध करते आए थे कि सबके प्रिय पात्र बन गए। उनके महान् व्यक्तित्व को जितना सराहा जाता है, शायद ही कोई और ऐसा व्यक्तित्व होगा, जिसे इतना स्नेह और प्रशंसा मिली होगी।
यह पुस्तक उनके प्रेरक व्यक्तित्व के प्रति श्रद्धासुमन स्वरूप समर्पित है। इसमें उनके बाल्यकाल और युवावस्था से जुड़े अनेक रोचक व प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत हैं, जिनमें से अनेक बिल्कुल अनजाने हैं और इन्होंने उनके महान् व्यक्तित्व को गढ़ने में सहायता की।
इस पुस्तक में दिए चित्रों के माध्यम से पाठक उनके जीवन और कार्यों का जीवंत अनुभव पा सकते हैं। इन प्रसंगों को जिस तरह पुस्तक के आकार में पिरोया है, वह निश्चित रूप से सबके लिए पे्ररणादायी है।
डॉ. कलाम के प्रेरणाप्रद यशस्वी जीवन का दिग्दर्शन कराती अत्यंत पठनीय पुस्तक।
"
Book Details
-
ISBN9789351869603
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Uttar Pradesh Ki Nai Udaan
- Author Name:
Srijan Pal Singh +1
- Book Type:

- Description:
उत्तर प्रदेश—वह भूमि, जहाँ मानवीय कल्पनाएँ और दृढ निश्चय असाधारण कुशल श्रमिकों से लेकर किस्से बयान करते स्मारकों तथा विभिन्न धर्मों के संगम और भरपूर प्रकृति तक के विभिन्न रूप लेते हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उत्तर प्रदेश को मूल भारतीय सभ्यता का केंद्र बताया गया है। इसकी आध्यात्मिक प्राचीनता और अधिक गहरी है। बहुत से लोग इसे मनुष्य की उत्पत्ति के समय से पल्लवित होने पर विश्वास करते हैं। अपने प्रत्येक रूप में यह अनंत संभावनाओं की भूमि है। लखनऊ के निकट एक छोटा सा शहर अयोध्या, जो भगवान् विष्णु के अवतार श्रीराम की जन्म-स्थली है। पश्चिमी भाग में ताजमहल का शहर आगरा स्थित है। राजधानी दिल्ली तथा इसके उपनगर नोएडा व गाजियाबाद के निकट होने के चलते हाई-टेक उद्योग तथा आई.टी. व मीडिया कारोबार के पनपने से यहाँ भारतीयों की नई पीढ़ी की गहमागहमी रहती है। बनारस के गंगा घाट से पूर्व की ओर त्वरित गति से निर्मित हो रहे मॉल और पश्चिम की ओर सड़कों के ऊपर से लगभग उड़ती हुई शीघ्रगामी मेट्रो उत्तर प्रदेश में आधुनिकता व परंपरा की मिलन-स्थली का प्रतिनिधित्व करते हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे निर्विवाद रूप से देश का सबसे बेहतरीन सुपर हाई-वे है, जहाँ केवल कारें ही नहीं दौड़तीं, बल्कि लड़ाकू जेट विमान भी उतारे जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश की विकास-गाथा है यह पुस्तक, जो इस प्रदेश के माहात्म्य और संभावनाओं को समग्रता में प्रस्तुत करती है।
AAO BACHCHO AVISHKARAK BANEN
- Author Name:
Srijan Pal Singh +1
- Book Type:

- Description:
महान् वैज्ञानिकों का मस्तिष्क प्रश्नों से भरा होने के कारण सदैव अशांत रहता है। वे किसी भी बात के लिए पूछते हैं कि ऐसा क्यों होता है? क्या मैं इससे बेहतर कर सकता हूँ? या इससे बेहतर क्या हो सकता है? वे प्रश्नों से लबालब भरे होते हैं, कभी-कभी वे अपने प्रश्नों से दूसरों को भी नाराज कर देते हैं। प्यारे बच्चो, क्या तुम अनुमान लगा सकते हो कि अलेक्जेंडर ग्राहम बेल का सबसे अधिक लोकप्रिय छात्र कौन था? वह हेलेन कीलर थी, जो दृष्टिहीन तथा बधिर होने के साथ-साथ एक महान् लेखिका, समाजसेविका तथा कवयित्री थीं। महान् वैज्ञानिक छोटी-से-छोटी घटनाओं से भी अत्यधिक प्रेरित होते हैं। वे असफलता को सफलता प्राप्ति की एक सीढ़ी के रूप में प्रयोग कर लेते हैं। युवाशक्ति के प्रेरणास्रोत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का आपसे आग्रह है कि अपना छोटा सा लक्ष्य चुनें, अपने भीतर एक नई ऊर्जा का संचार करें और एक ऊँची उड़ान भरने के लिए उद्यत हो जाएँ। यह पुस्तक छात्रों-युवाओं में कुछ नया करने की प्रेरणा देती है, ताकि नवाचार और आविष्कार कर हम समाज को बेहतर बनाने में कुछ योगदान दे सकें।
Childhood Of Kalam
- Author Name:
Srijan Pal Singh
- Book Type:

- Description:
Greatness is not by accident. Greatness is a quality processed, honed and learnt over a lifetime of learning and hard work. Great human beings are built when a curious mind is met with life-changing lessons, often early in childhood. Just like the nature and quality of a tree are decided by the characteristic of the seed, and how it is sown, the worth of human life is shaped in the early stage of childhood. Often these life teachings as a growing up child transform into the values which set the boundaries of one�s adult actions and govern one�s decisions. We all know Dr Kalam as an eminent teacher, an excellent President, an exception scientist, a talented rocket scientist, a team man, an institution builder and a man of ethics and integrity. But what went behind the scenes in the formative days of "Little Kalam" shaped him slowly but surely into Dr Kalam � , the man we remember and admire. This book aspires to take you into this early history of the childhood of Kalam, tracking "Little Kalam" as he begins his first steps into the sands of Rameshwaram � , which one day will translate into a march to the Rashtrapati Bhawan.
Ethics For Civil Services With 100 Case Studies
- Author Name:
Alok Ranjan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Hanuman Gatha (Shri Hanuman Ji Ka Sampuran Jeevan Gatha) Devotional & Spiritual Hanuman Katha Book in Hindi
- Author Name:
Ashok Narayan
- Book Type:

- Description:
ज्ञानिनामाग्रगण्य सकल गुणनिधान कपिप्रवर हनुमान के बारे में कौन नहीं जानता? अद्वितीय प्रतिभा और अतुलित बल के कुबेर होते हुए भी उन्होंने स्वार्थ के लिए उसका उपयोग कभी नहीं किया। साधारण मनुष्य में यदि विद्या, गुण या कौशल आदि थोड़े से गुण भी आ जाएँ, तो वह दर्प से चूर हो जाता है, परंतु हनुमान सर्वगुण-संपन्न होकर भी सेवक ही बने रहे। प्रस्तुत पुस्तक ‘हनुमानगाथा’ में संकट-मोचक हनुमान के संपूर्ण जीवन को रामायण, रामचरितमानस आदि ग्रंथों के परिप्रेक्ष्य में आत्मकथात्मक शैली में पवनपुत्र के श्रीमुख से विवेचन हुआ है। हनुमान का चरित्र अलौकिक गुणों से संपन्न असंभव को संभव बनानेवाला है। आज के भौतिकवादी संसार में हनुमान के पावनचरित को अपनाए जाने की महती आवश्यकता है। वर्तमान में संसार को सेवा और भक्ति की पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है। इसके लिए सबसे बड़े आदर्श और प्रेरणास्रोत हनुमान ही हो सकते हैं। इस नाते परोपकारी हनुमान का चरित अनुकरणीय है। सुधी पाठक हनुमान के पावन गुणों को आत्मसात् कर घोर कष्टों और अशांति से निजात पाएँ, इसी में इस पुस्तक के लेखन की सफलता है।
The Little Book of Rumi
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Sanskritik Rashtravad Ke Agradoot Pt. Deendayal Upadhyaya
- Author Name:
Dr. Guptisagarji Gurudev
- Book Type:

- Description:
पं दीनदयाल उपाध्याय बीसवीं शताब्दी को अपने विलक्षण व्यक्तित्व, अपरिमेय कर्तृत्व एवं क्रांतिकारी दृष्टिकोण से प्रभावित करनेवाले युगद्रष्टा ऋषि, महर्षि एवं ब्रह्मर्षि थे। उपाध्यायजी के पुरुषार्थी जीवन की सबसे बड़ी पहचान है गत्यात्मकता। वे अपने जीवन में कभी कहीं रुके नहीं, झुके नहीं। यही कारण है कि समस्त प्रतिकूलताओं के बीच भी उन्होंने अपने लक्ष्य के दीप को सुरक्षित रखते हुए उदभासित किया। उन्होंने राष्ट्र-प्रेम को सर्वोच्च स्थान देने के साथ-साथ, शिक्षा, साहित्य, शोध, सेवा, संगठन, संस्कृति, साधना सभी के साथ जीवन-मूल्यों को तलाशा, उन्हें जीवन-शैली से जोड़ा। इस पुस्तक में पंडितजी को एक ऐसे राजनेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने न केवल स्वयं भारत को भारत के दृष्टिकोण से जानने-समझने-देखने की दृष्टि विकसित की, अपितु दूसरों को भी वैसी ही संदृष्टि प्रदान की। भारत की चिति एवं प्रकृति के मौलिक एवं सूक्ष्म द्रष्टा थे 'पं. दीनदयाल उपाध्यायजी, जिन्होंने सही अर्थों में व्यष्टि एवं समष्टि के चिरंतन सत्य एवं सदियों के अनुभव का साक्षात्कार कर, एक ऐसे उदबोध को प्रवृत्त किया, जिसका स्पंदन भारत की माटी में समाहित है। यह कृति “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत : पं. दीनदयाल उपाध्याय ' पंडितजी के विचार पाथेय को जन-जन तक पहुँचाने में निमित्त बनेगी और भारतीय संस्कृति के बिंब, जन-संस्कृति के रूप में वैश्विक धरातल पर नई चेतना को स्फूर्त करेगी; ऐसा दृढ़ विश्वास है।
Sadak Se Sansad Tak
- Author Name:
Shivanand Tiwari
- Book Type:

- Description:
लोहिया, जेपी, किशन पटनायक, रामानन्द तिवारी, कर्पूरी ठाकुर वाली परम्परा के ही नेता हैं शिवानंद तिवारी। जितना लम्बा उनका राजनीतिक जीवन है आज की राजनीति में कम लोगों का है। वे गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपाई राजनीति करते रहे हैं और सन् पैंसठ के पहले से सक्रिय हैं। बाबा के नाम से विख्यात शिवानन्द जी के पास अनुभव, किस्सों और प्रत्यक्ष देखी घटनाओं का सम्भवत: सबसे बड़ा खजाना है। वे साठ के दशक के आखिर में शुरू हुए अंग्रेजी हटाओ आन्दोलन वाले दौर से सक्रिय रहे हैं और चौहत्तर के जेपी आन्दोलन के अगुआ लोगों में हैं। उन्होंने किशन पटनायक के साथ लोहिया विचार मंच और समता संगठन की राजनीति की और उनसे अलग होकर भी उनकी वैचारिक और व्यावहारिक राजनीति के पाठ से अलग नहीं हुए। इन भाषणों और टिप्पणियों से उनके चिन्तन का दायरा और दिशा झलकती है। साफ लगता है कि भूमंडलीकरण और साम्प्रदायिक राजनीति उनकी चिन्ता के केन्द्र में है। शिवानंद जी के इन भाषणों में किसानों की आत्महत्या, बुनकरों की भुखमरी और आत्महत्या, पेटेंट रीजीम से होने वाली मुश्किलों और उसकी कानूनी लड़ाई, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा गरीबों का भोजन बढ़ाने से महँगाई आने के कुतर्क की आलोचना, किसानों के खेती छोड़ने पर टिप्पणी है। और इसमें से काफी चीजों के लिए नई आर्थिक नीतियों को दोषी बताया गया है। यह आलोचना सही थी और यह किताब का महत्त्व है क्योंकि भूमंडलीकरण के पूरे दौर में कहीं से संसद के अन्दर इन नीतियों की आलोचना नहीं हुई।
Leo Tolstoy Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Leo Tolstoy
- Book Type:

- Description:
"‘‘क्या वे लोग खेत जोत रहे हैं? क्या उन लोगों ने अपना काम खत्म कर लिया?’’ ‘‘उन लोगों ने आधे से अधिक खेत जोत लिये हैं।’’ ‘‘क्या कुछ भी काम बचा नहीं है?’’ ‘‘मुझे तो नहीं दिखा; पर उन्होंने जुताई अच्छी तरह से की है। वे सभी डरे हुए हैं।’’ ‘‘ठीक है। अब तो जमीन ठीक हो गई है न?’’ ‘‘हाँ, अब खेत तैयार हैं और उनमें अफीम के पौधों के बीज डाले जा सकते हैं।’’ मैनेजर थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला, ‘‘वे लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं? क्या वे मुझे गाली देते हैं?’’ बूढ़ा कुछ हकलाने लगा, पर माइकल ने उसे सच बोलने के लिए कहा, ‘‘तुम मुझे सच बताओ। तुम अपने शब्द नहीं, बल्कि किसी और के शब्द बोल रहे हो। यदि तुम मुझे सच-सच बताओगे, तब मैं तुमको इनाम दूँगा; और अगर तुम मुझे धोखा दोगे तो ध्यान रखना, मैं तुम्हें बहुत मारूँगा। कर्तुशा! इसे एक गिलास वोदका दो, ताकि इसमें साहस पैदा हो।’’ —इसी संग्रह से • सुप्रसिद्ध रूसी कथाकार लियो टॉलस्टॉय ने जीवन के सभी पक्षों पर प्रभावी रचनाएँ की हैं। उन्होंने धर्म में व्याप्त पाखंड तथा तत्कालीन कुरीतियों को अनावृत किया। मनोरंजन के साथ-साथ मन को उद्वेलित करनेवाली सरस टॉलस्टॉय की लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।"
Ikigai
- Author Name:
Dr. Rashmi
- Book Type:

- Description:
क्या है इकिगाई इकिगाई के बारे में कोई भी चर्चा मिएको कामिया के उल्लेख के बिना पूरी नहीं होगी, जिन्हें प्राय: ‘इकिगाई मनोविज्ञान की माँ’ कहा जाता है। वह इकिगाई के अध्ययन में अग्रणी लोगों में शामिल थीं और अपनी पुस्तक ‘इकिगाईनी- सुइत’ (क्या हमारे जीवन को जीने योग्य बनाता है) में उन्होंने अपने विचारों और शोध कार्य को प्रस्तुत किया है। पुस्तक को इकिगाई साहित्य में श्रेष्ठ ग्रंथों में माना जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि यह सन 1966 में प्रकाशित हुई थी। —इसी पुस्तक से इकिगाई में जीवन में खुशियाँ समाई हैं। यह हमारे होने का कारण है। इकिगाई की मदद से आप जीवन में हर दिन संतुलन, प्रसन्नता और तृप्ति ढूँढ़ पाते हैं। इकिगाई मात्र एक जीवन-दर्शन या विचारधारा नहीं बल्कि एक परिवर्तनकारी मानव-अनुभव है। इकिगाई किसी कंपास की तरह कॅरियर और जीवन के फैसलों में राह दिखा सकता है।
BPSC TRE 4.0 Bihar Shikshak Bahali Class 11 To 12 Geography (Bhugol) Higher Secondary School Teacher | 20 Practice Sets with Latest Solved Papers | Based on NCERT & SCERT Syllabus - Book in Hindi
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Katha Ek Kans Ki "कथा एक कंस की" | A Classic Play of Theatre Book in Hindi
- Author Name:
Daya Prakash Sinha
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Dostoevsky Ka Ghoda
- Author Name:
Shachinder Arya
- Book Type:

- Description:
शचींद्र आर्य की किताब 'दोस्तोएवस्की का घोड़ा' से गुज़रते कुछ ऐसा एहसास हुआ कि कोई अपने मन के अंतरंग कोनों अतरों को परत दर परत उधेड़ रहा है बिना हिचक के, ज़रा निस्संग हुये और एक जगह जहाँ वो लिखते हैं, कुछ ऐसी जगहें होती हैं जहाँ हम खुद होते हैं अपने आप में बिलकुल नंगे, तो इन्हीं गलियों में शचींद्र हमें लिये चलते हैं, बहुत ईमानदारी से, बहुत हौसले से। बहुत सरलता से। इन पन्नों में हम उनके बचपन, उनके परिवार, उनकी दुनिया और दोस्त अहबाब, जि़ंदगी के तमाम ज़द्दोज़हद और रंगीनी, जीवन के दुलार और मीठेपन को उनकी नज़र से देखते चलते हैं, उनके पढऩे और उन पढ़े का उनपर असर को देखते हैं और धीरे-धीरे उनकी दुनिया हमारे भीतर सहजता से प्रवेश करती जाती है। एक किस्म के ठहराव और संजीदगी के साथ। तब उनकी दुनिया सिर्फ उनकी नहीं रह जाती, कुछ कुछ हमारी भी होती जाती है। कथेतर के इस कथ्य में उन्होंने जो पारदर्शिता दिखाई है, जो बुनावट और कहन का हुनर दिखाया है, जो परिपक्वता दिखाई है वो खुशी और उम्मीद जगाने वाली बात है। इसलिये भी कि वो पारंपरिक विधा से अपने को अलग करते दिखते हैं। डायरी की विधा ऐसी नहीं कि नई है पर शुरुआती दौर में इस तरह की दुनिया में प्रवेश कर लेने की साध सुखद है। ये सचमुच 'याद की किताब' है' और उनकी याद में हमारी याद भी घुलती मिलती चलती है, इसकी उन्हें बहुत बधाई और अशेष शुभकामनायें। —प्रत्यक्षा
Sundarakanda
- Author Name:
Tulsidas
- Book Type:

- Description:
संवत् 1631 में तुलसीदासजी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारंभ की। दो वर्ष, सात महीने और छब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रंथ संपन्न हुआ। सुंदरकांड मूलतः गोस्वामी तुलसीदास कृत इसी श्रीरामचरित मानस का एक भाग है। सुंदरकांड में हनुमानजी द्वारा किए गए महान् कार्यों का वर्णन है। मानस पाठ में सुंदरकांड के पाठ का विशेष महत्त्व माना जाता है। सुंदरकांड में हनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन कर लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। साथ ही उनकी असीम शक्ति, बुद्धि-कौशल और अनन्य भक्ति का पता चलता है। सुंदरकांड का पारायण वाले साधक को असीम ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त होती है।
Rochak Bal Kathayen
- Author Name:
Shriramvriksha Benipuri
- Book Type:

- Description:
"रोचक बाल कथाएँ स्वागत-समिति के अध्यक्ष महाराज रोहूजी की आज्ञा लेकर मंत्री श्रीमती पोठिया देवी ने कार्य आरंभ किया। सबसे पहले संगीताचार्य श्री मेढकजी खड़े होकर मृदंग बजाने और अपनी सुरीली आवाज में स्वागत-गीत गाने लगे— टर्र! टर्र! टर्र! आओ-आओ जलचर-भाई। हिलें-मिलें सब फूट बिहाई। दुश्मन-मुँह पर उड़े हवाई। टर्र! टर्र! टर्र! यह बगुला जो भगत बना है। रूप श्वेत मन श्याम घना है। बिना हटाए चैन मना है।। टर्र! टर्र! टर्र! —इसी पुस्तक से ‘रोचक बाल कथाएँ’ पुस्तक को बेनीपुरीजी ने अपनी पहली संतान—पुत्री—को भेंट किया था यह लिखते हुए—“जिसका मुख देखने का सौभाग्य भी मुझे प्राप्त नहीं हुआ था, अपनी उसी प्रथम स्वर्गीय संतान की शिशु-आत्मा के पारलौकिक मनोरंजन के लिए यह सस्नेह समर्पित है।” यह अपने समय की सबकी लोकप्रिय व प्रशंसित बाल-पुस्तक मानी जाती है।
Leo Tolstoy
- Author Name:
Ramesh Ranjan
- Book Type:

- Description:
"रूस के महान् लेखक लियो टाल्सटॉय 19वीं सदी के एक सम्मानित लेखक थे। युवावस्था में कुछ समय उन्होंने रूसी सेना में नौकरी की और इसी दौरान क्रीमियन युद्ध (1855) में भाग लिया। अगले वर्ष ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी और लेखन आरंभ कर दिया, जिसकी नींव उनके बचपन में ही पड़ चुकी थी। उनके उपन्यास ‘वॉर ऐंड पीस’ (1865-69) तथा ‘एना कैरनीना’ (1875-77) विश्व साहित्य की महान् रचनाओं में शामिल हैं। आर्थिक दृष्टि से अति संपन्न और सम्मानित होने के बावजूद वे आंतरिक शांति के लिए तरसते रहे। आखिरकार सन् 1890 में घर-बार और धन-संपत्ति त्यागकर वे गरीबों की सेवा करने लगे और 20 नवंबर, 1910 को कंगाली की हालत में गुमनाम वृद्ध के रूप में मृत्यु को प्राप्त हुए। मानव मन को छूनेवाली सामाजिक समदर्शिता और पारस्परिकता का बोध करानेवाली अगणित पठनीय रचनाओं के महान् लेखक की प्रेरणादायी जीवनी।"
Sapnon ki Unchi Udaan 'सपनों की ऊँची उड़ान' Book in Hindi | Raja D. Tharwani
- Author Name:
Raja D. Tharwani
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Pauranik Bal Kathayen
- Author Name:
Mukesh 'Nadan'
- Book Type:

- Description:
हिंदुधर्म में वेद-पुराणों का बहुत महत्व है। इन्हीं वेद-पुराणों में ऋषियों महापुरुषों तथा देवी-देवाओं की अनेक कथाएँ पढ़ने व सुनने को मिलती है। इन्हीं से हमें अपनी संस्कृति तथा पूर्वजों के इतिहास का ज्ञान भी मिलता है। वेद-पुराणों की ऐसी ही अनेक बाल कथाओं को हमने इस पुस्तक मे संगृहीत करने का प्रसास किया है, जो हमारे मनोरंजन के साथ-साथ बुद्धि के विकास में भी सहायक होंगी।
1000 Hindi Sahitya Prashnottari
- Author Name:
Dr. Kumud Sharma
- Book Type:

- Description:
"वर्तमान युग में हर व्यक्ति को जीवन के विभिन्न स्तरों पर अनेक प्रतियोगिताओं से गुजरना पड़ता है । राज्य स्तर पर और केंद्रीय स्तर पर विभिन्न महत्त्वपूर्ण संस्थानों के महत्त्वपूर्ण पदों के लिए ली जानेवाली प्रतियोगी परीक्षाओं में अन्य विषयों के साथ- साथ हिंदी भाषा और साहित्य से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित प्रश्न भी सम्मिलित होते हैं । इस पुस्तक में 1000 प्रश्नों को अठारह महत्त्वपूर्ण अध्यायों - भाषा, हिंदी साहित्य का इतिहास, कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध- आलोचना, रेखाचित्र- संस्मरण, आत्मकथा-जीवनी, यात्रा साहित्य, रिपोर्ताज, साक्षात्कार और पत्र साहित्य, काव्य शास्त्र, साहित्यिक पत्रकारिता, संस्थाएँ पुरस्कार, चित्रावली तथा विविध-में बाँटा गया है । प्रत्येक प्रश्न के लिए अध्याय का निर्धारण पाठकों की सुविधा के लिए किया गया है । समय की माँग और समय की कमी के कारण साहित्य के विराट् फलक में प्रवेश कर उसे आत्मसात् करने का अवसर बहुतों के पास नहीं है । यह पुस्तक बहुत सुगमता से ऐसे व्यक्तियों को हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण बिंदुओं और वस्तुनिष्ठ तथ्यों से परिचित कराने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है । पुस्तक में हिंदी साहित्य के व्यापक परिदृश्य पर फैले केंद्रीय और महत्त्वपूर्ण प्रश्नों को समेटने की कोशिश की गई है । भाषा संबंधी प्रश्नों के साथ-साथ हिंदी साहित्य का इतिहास, काव्य शास्त्र, साहित्यिक संस्थाओं, पुरस्कारों से संबंधित प्रश्न इसमें सम्मिलित हैं ।कुछ महत्त्वपूर्ण रचनाकारो की चित्रावली भी इसमें समाविष्ट है । यह पुस्तक अपने आपमें हिंदी साहित्य का इतिहास है । "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book