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Mopala Kand-1921

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1921 में केरल के मलबार में मोपलाओं द्वारा किए गए हिंदू नरसंहार के जघन्य कुकृत्य को एक शताब्दी बीत चुकी है | लेकिन इस लंबे कालखंड में भी इस बृशंस हत्याकांड के बारे में झूठा और मिथ्या दुष्प्रचार किया जाता रहा | हिंदुओं पर अत्याचार करना, हिंदुओं की संपत्तियों को लूटना, धर्मांतरण आदि जैसे नीच कार्य करनेवालों को स्वतंत्रता सेनानी के समान जनता के सामने पेश करने का दुस्साहस वामपंथियों की बौद्धिक रीति का आक्रमण ही है ।कांग्रेस और वामपंथियों ने मोपला दंगे को स्वतंत्रता-संग्राम और किसानों के आंदोलन के रुप में प्रस्तुत कर इतिहास को बदलने का अक्षम्य कार्य किया | साजिश के तहत मोपला दंगे को कांग्रेस व कम्युनिस्टों ने मजदूरों और जमींदारों के बीच का झगड़ा बताया | आध्यात्मिक प्रदेश केरल में बेचारी अल्पसंख्यक हिंदू जनता ने मुसलमानों के अत्याचारों और बर्बरता की जितनी यातनाएँ झेलीं, उन्हें ठोस प्रमाण के साथ लेखक ने इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है मंदिरों को ध्वस्त करना, स्त्रियों का मान भंग करना, हिंदुओं की संपत्तियों को लूटना, हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण कराना तथा दंगों के समय भारत के अन्य प्रदेशों से मोपलाओं को इस कुकृत्य में मदद मिली-ऐसे अनेक विषयों का भी उल्लेख लेखक ने इस पुस्तक में किया है | आज की पीढ़ी हिंदुओं के उस बीभत्स नरसंहार के पीछे की कुत्सित मानसिकता को जान पाए, इस मंतव्य से यह पुस्तक लिखी गई है |

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1921 में केरल के मलबार में मोपलाओं द्वारा किए गए हिंदू नरसंहार के जघन्य कुकृत्य को एक शताब्दी बीत चुकी है | लेकिन इस लंबे कालखंड में भी इस बृशंस हत्याकांड के बारे में झूठा और मिथ्या दुष्प्रचार किया जाता रहा |
हिंदुओं पर अत्याचार करना, हिंदुओं की संपत्तियों को लूटना, धर्मांतरण आदि जैसे नीच कार्य करनेवालों को स्वतंत्रता सेनानी के समान जनता के सामने पेश करने का दुस्साहस वामपंथियों की बौद्धिक रीति का आक्रमण ही है ।कांग्रेस और वामपंथियों ने मोपला दंगे को स्वतंत्रता-संग्राम और किसानों के आंदोलन के रुप में प्रस्तुत कर इतिहास को बदलने का अक्षम्य कार्य किया |

साजिश के तहत मोपला दंगे को कांग्रेस व कम्युनिस्टों ने मजदूरों और जमींदारों के बीच का झगड़ा बताया | आध्यात्मिक प्रदेश केरल में बेचारी अल्पसंख्यक हिंदू जनता ने मुसलमानों के अत्याचारों और बर्बरता की जितनी यातनाएँ झेलीं, उन्हें ठोस प्रमाण के साथ लेखक ने इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है

मंदिरों को ध्वस्त करना, स्त्रियों का मान भंग करना, हिंदुओं की संपत्तियों को लूटना, हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण कराना तथा दंगों के समय भारत के अन्य प्रदेशों से मोपलाओं को इस कुकृत्य में मदद मिली-ऐसे अनेक विषयों का भी उल्लेख लेखक ने इस पुस्तक में किया है | आज की पीढ़ी हिंदुओं के उस बीभत्स नरसंहार के पीछे की कुत्सित मानसिकता को जान पाए, इस मंतव्य से यह पुस्तक लिखी गई है |

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
175 grams
ISBN-13
9789355212221
Pages
88
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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