Trishuldhari
About the book
"देवों और असुरों की एक ऐसी कहानी, जिसमें ध्रुव-लोक नाम के मिथकीय देश में भगवान् शिव का त्रिशूल रखा है, जिसे सदियों से कोई भी धारण नहीं कर सका है। भविष्यवाणी, शपथ, वरदान और अभिशाप के साथ न्याय, कर्तव्य और प्रेम के बीच एक साहसिक युद्ध की परिस्थितियाँ बन चुकी हैं। शक्तिशाली त्रिशूल को किसने धारण किया? अवश्यंभावी युद्ध में भगवान् विष्णु किसका पक्ष लेंगे? क्या एक सदाचारी अपनी शपथ का पालन करने के लिए अधर्म करेगा? क्या एक निम्नवर्गीय छात्र के साथ अन्याय होगा? क्या एक राजा अपने पुत्र-प्रेम में बँध जाएगा? धर्म का पालन कौन करता है और कौन डगमगा जाता है? एक युद्ध-कथा इस विषय पर कि मनुष्य होने का अर्थ क्या होता है! प्रस्तुत पुस्तक आपको इस महागाथा के मूल तक ले जाती है। देवों और असुरों की सेनाएँ अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करने के लिए आमने-सामने खड़ी हैं। सभी के प्रारब्ध आपस में टकराने वाले हैं और एक भीषण संग्राम छिड़ने वाला है।
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About the Book
"देवों और असुरों की एक ऐसी कहानी, जिसमें ध्रुव-लोक नाम के मिथकीय देश में भगवान् शिव का त्रिशूल रखा है, जिसे सदियों से कोई भी धारण नहीं कर सका है। भविष्यवाणी, शपथ, वरदान और अभिशाप के साथ न्याय, कर्तव्य और प्रेम के बीच एक साहसिक युद्ध की परिस्थितियाँ बन चुकी हैं।
शक्तिशाली त्रिशूल को किसने धारण किया?
अवश्यंभावी युद्ध में भगवान् विष्णु किसका पक्ष लेंगे?
क्या एक सदाचारी अपनी शपथ का पालन करने के लिए अधर्म करेगा?
क्या एक निम्नवर्गीय छात्र के साथ अन्याय होगा?
क्या एक राजा अपने पुत्र-प्रेम में बँध जाएगा?
धर्म का पालन कौन करता है और कौन डगमगा जाता है?
एक युद्ध-कथा इस विषय पर कि मनुष्य होने का अर्थ क्या होता है!
प्रस्तुत पुस्तक आपको इस महागाथा के मूल तक ले जाती है। देवों और असुरों की सेनाएँ अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करने के लिए आमने-सामने खड़ी हैं। सभी के प्रारब्ध आपस में टकराने वाले हैं और एक भीषण संग्राम छिड़ने वाला है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 277 grams
- ISBN-13
- 9789390900985
- Pages
- 344
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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Trishuldhari unfolds in Dhruv-Lok, a mythical land where Lord Shiva's trident has stood untouched for centuries, awaiting the one destined to wield it. At its heart lies a gripping question: what happens when destiny, dharma, and desire collide in a world ruled by ancient vows and divine consequences? This Hindi mythological fiction weaves together the eternal conflict between devas and asuras, grounded not in a simple good-versus-evil narrative but in the moral complexities of prophecy, oaths, boons, and curses. The narrative turns on several charged questions: Who will finally bear the trident? Will Lord Vishnu intervene, and if so, on whose side? Can a virtuous soul commit adharma to honour a sacred vow? Will a student from a lower caste face injustice, and will a king's love for his son cloud his judgment?
What distinguishes this work is its layering of classical mythological motifs with the internal dilemmas of dharma, kartavya (duty), and prem (love). The book does not offer easy answers; instead, it places its characters at crossroads where every choice carries cosmic weight. Readers drawn to Indian epic traditions reimagined with psychological depth and moral ambiguity will find Trishuldhari a compelling addition to contemporary Hindi mythological fiction literature.
त्रिशूलधारी पढ़ने का अनुभव कैसा होगा?
यह कहानी आपको ध्रुव-लोक की पौराणिक दुनिया में ले जाएगी, जहाँ हर निर्णय नैतिक द्वंद्व से भरा है। कथा की गति साहसिक युद्ध और आंतरिक संघर्ष के बीच संतुलित है। आप भविष्यवाणी, शपथ, वरदान और अभिशाप के जटिल जाल में उलझे हुए पात्रों के साथ यात्रा करेंगे। यह पुस्तक उन पाठकों को संतुष्ट करेगी जो पौराणिक कथाओं में गहराई और नैतिक प्रश्न चाहते हैं।
Trishuldhari पुस्तक किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है?
- भारतीय पौराणिक कथाओं और देव-असुर संघर्षों में रुचि रखने वाले पाठक
- जो धर्म, कर्तव्य और प्रेम के बीच संघर्ष की जटिल कथाओं की सराहना करते हैं
- समकालीन हिंदी फ़ैंटेसी साहित्य के प्रेमी
- जो शिव और विष्णु जैसे देवताओं की नई व्याख्याओं में रुचि रखते हैं
Trishuldhari पुस्तक के विषय का आज के भारतीय पाठकों के लिए क्या महत्व है?
यह कहानी धर्म और अधर्म के बीच की धुंधली रेखा को उजागर करती है, जो आज के भारत में भी प्रासंगिक है। निम्नवर्गीय छात्र के साथ अन्याय और राजा के पुत्र-प्रेम में बंधने जैसे प्रश्न सामाजिक न्याय, जाति व्यवस्था और पारिवारिक कर्तव्य की समकालीन बहसों को प्रतिबिंबित करते हैं। यह पौराणिक ढांचे में आधुनिक नैतिक द्वंद्वों को प्रस्तुत करती है।
लेखक का यह Trishuldhari प्रस्तुत करने का तरीका क्या विशिष्ट बनाता है?
लेखक ने पारंपरिक पौराणिक तत्वों—भविष्यवाणी, शपथ, वरदान और अभिशाप—को नैतिक जटिलता के साथ बुना है। कहानी सरल अच्छे-बुरे के द्वंद्व से आगे जाकर पूछती है: क्या एक सदाचारी व्यक्ति शपथ निभाने के लिए अधर्म करेगा? यह दृष्टिकोण पौराणिक कथा को मनोवैज्ञानिक गहराई देता है और पाठक को सोचने पर मजबूर करता है।
Trishuldhari पुस्तक पाठक के मन में समाप्ति के बाद क्या छोड़ जाएगी?
- नैतिक निर्णयों की जटिलता और धर्म के बहुआयामी स्वरूप की समझ
- शक्ति, कर्तव्य और प्रेम के बीच संतुलन पर गहरा चिंतन
- भारतीय पौराणिक कथाओं की समकालीन प्रासंगिकता का बोध
- यह सवाल कि क्या पवित्र शपथ हमेशा न्याय की ओर ले जाती है

