Shiva
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This delightful collection of stories from Indian mythology introduces young readers to our enriching and ancient culture and wisdom.
Read moreAbout the Book
This delightful collection of stories from Indian mythology introduces young readers to our enriching and ancient culture and wisdom.
Book Details
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ISBN9789354404252
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Pages16
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Avg Reading Time1 hrs
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Age5-7 yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ‘खेळघर' या अनवट वाटेने जाणाऱ्या पहिल्यावहिल्या कादंबरीनंतर एका दशकाने आला आहे रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ यांचा हा पहिला कथासंग्रह.यातील पात्रं, प्रसंग, त्यांचा भवताल व अंतर्विश्व, सारं काही चिमटीत न सापडणारं आहे. एकीकडे सीटी स्कॅनप्रमाणे विविध प्रतलांवरून घेतलेले वास्तवाचे सूक्ष्म छेद, तर दुसरीकडे नातेसंबंध, जगण्यातील पेच व मूल्यसंघर्ष यातील अलवार, निसरड्या जागा. त्यात वावरणारी माणसंही अस्सल, या मातीतील असूनही वेगळ्याच रसायनाने बनलेली. कुणी बेरकी, कुणी निरागस, पण जगण्याच्या उत्कट धगीने रसरसलेली, खोल गाभ्याशी प्रामाणिक.भवतालातील असंख्य संदर्भ जागवणारं, पण त्याचसोबत वास्तव व कल्पित यातील सीमारेषा पुसणारं हे तरल पण दाहक लेखन तुमच्या मनात दीर्घकाळ वसती करून राहील. Gori Gori Pan | Ravindra Rukmini Pandharinath गोरी गोरी पान | रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ
Bhakta Prahlad Stories Book
- Author Name:
M.I. Rajasvi
- Book Type:

- Description: पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, जब संपूर्ण सृष्टि हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु जैसे असुरों के आतंक से त्रस्त थी। चारों ओर आसुरी शक्तियों की प्रबलता थी। धर्म-कर्म और वेद-यज्ञ आदि की प्रतिष्ठा लगभग निष्प्राण हो चुकी थी। ऐसे विपरीत और गहन धार्मिक संकटकाल में भी प्रह्लाद जैसे भक्त की पावन भक्ति ने श्रीहरि को नरसिंह अवतार धारण करने हेतु प्रेरित किया। अंततः जब हिरण्यकशिपु के अत्याचारों एवं पापों का घड़ा भर गया तो भगवान् विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर अत्याचारी हिरण्यकशिपु का अंत कर दिया। प्रस्तत पुस्तक 'भक्त प्रह्लाद' में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा को बहुत ही सरल, सहज एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भगवद्भक्ति, सत्य व सदाचार, निष्ठा, समर्पण, संकल्प जैसे जीवनमूल्यों का संचार करने वाली प्रेरक पुस्तक ।
Fukatchech Salle
- Author Name:
Dr. Ravindra Laxmikant Tamboli
- Book Type:

- Description: वाचाल तर वाचाल, असे आम्हाला शिकवले गेले होते. म्हणून आम्ही वाचत गेलो आणि वाचलेले जे काही होते त्यामुळेच संपन्नपणे वाढलो. अलीकडेही ‘वॉचाल' तर बिघडाल असे पोटतिडकीने सांगूनही वाचनावर बहिष्कार का टाकला जात आहे, याचा उलगडा होऊ शकत नाही. अनुत्तरित प्रश्नांवर खूप चिंतन करून उत्तर शोधायचे असते म्हणून आम्ही त्या शोधात वेळोवेळी जे काही लिहीत गेलो त्यातील काही लिखाण ‘फुकटचे सल्ले' म्हणून या पुस्तकात एकत्रितपणे दिले आहे.हे सल्ले फुकटचे असले तरी त्यांना अनुभवांचा आधार आहे. म्हणून ते महत्त्वाचे ठरतात. तेव्हा सदरचे पुस्तक विकत घेऊन आमचे हे फुकटचे सल्ले आपल्या जीवनात उपयोगात आणाल अशी आशा आहे. Fukatchech Salle | Dr.Ravindra Laxmikant Tamboli फुकटचेच सल्ले | डॉ.रवींद्र लक्ष्मीकांत तांबोळी
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