(हर पंक्ति में 5/7/5 वर्ण और 26 मात्राएं )
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भेद प्रीति के / हरदम अपने / खोले नैनों से
रति की भाषा / अधर नहीं वह / बोले नैनों से |
इक ख़ामोशी / लब पर उसके / देखी छायी-सी
वो तो केवल / मुझमें अमरित / घोले नैनों से |
तीर चुभा है / इधर हृदय में / भारी पीडाएं
किन्तु गिला क्या / मधुमय सूरत / भोले नैनों से |
यदि छूओ तो / विफर उठे वह / आँखों-आँखों में
नैनों के ही / वह अभिवादन / को ले नैनों से |
मिलना कैसा / अब तक उसका / ख्वाबों-घावों-सा
हम क्या चाहें / वह हमको बस / तोले नैनों से |
+रमेशराज
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