हाइकु विन्यास में एक ग़ज़ल
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प्रीति जगी जो / मन में सिहरन / होती तो होगी
उसकी काया / पल-पल चन्दन / होती तो होगी |
एक पहेली / इधर बना मन / बेगाना-सा है
उसके भी हाँ / दिल में उलझन / होती तो होगी |
आज हमारी / पल-पल व्याकुल / रातें-बातें हैं
कुछ बेचैनी / अब उसके मन / होती तो होगी |
हाल बुरा है / इत इस दिल का / खोया-खोया है
दुखी-दुखी-सी / उत भी धड़कन / होती तो होगी |
अपनी आँखें / इधर बनीं अब / मेघों-सी गीली
दुःख की वर्षा / उसकी अँखियन / होती तो होगी |
+रमेशराज
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