अपनी पोती के पांचवें जन्म दिवस पर सुमित्रा की खुशियों का पारावार नहीं था।
उसके बेटे और बहू को वह दिन याद आ गया जब सुमित्रा ने उन्हें गर्भपात कराने से रोका था।
और सुमित्रा अपनी पोती को गोद में बैठा कर कह रही थी कि, "बिटिया, आज मैं मेरे होने का जश्न मना रही हूँ।"
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