बिन पानी सूखा ही सूखा
+ रमेशराज
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तुम पानी से, हम पानी से
साँसों की सरगम पानी से |
बिन पानी सूखा ही सूखा
हरा-भरा मौसम पानी से |
पानी से नदियों में कल-कल
बूँदों की छम-छम पानी से |
बिन पानी के बीज न उगता
मिट्टी रहती नम पानी से |
बादल बरसे अगर धरा पर
आ जाता है दम पानी से |
हरा-भरा करता खेतों को
पानी का संगम पानी से |
पानी से मिलती है ‘ओटू’
पाते जीव रहम पानी से |
जल से यमुना, जल से गंगा
झेलम भी झेलम पानी से |
पानी से ही शंख-सीपियाँ
शैवालों में दम पानी से |
जल से ही मछली का जीवन
जीवन का परचम पानी से |
सूखी रोटी गले न उतरे
होती सदा हजम पानी से |
पोखर झील जलाशय झरने
इनमें लौटे दम पानी से |
सूखे हुए कंठ में जल तो
हट जाता मातम पानी से |
बिन पानी के जीवन सूना
पाते जीवन हम पानी से |
खेत सूखता देख कृषक की
आँखें होतीं नम पानी से |
पानी होता जैसे अमृत
मिट जाता हर गम पानी से |
व्यर्थ न फैलाओ पानी को
काम चलाओ कम पानी से |
करना सीखो जल का संचय
पाओ तभी रहम पानी से |
पानी है अनमोल धरा पर
तुम पानी से, हम पानी से |
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+रमेशराज, 15/109 ईसानगर, निकट थाना सासनी गेट,
अलीगढ़-202001
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