*तेवरी*
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नैतिकता ग़ायब नक़्शे से
है पहले-सा भूगोल। मत बोल।।
सब हैं खोटी नीयत वाले
अब सही लगेगा मोल। मत बोल।।
जो खुद भयभीत हुआ बैठा
खोलेगा खल की पोल!मत बोल।।
ये झूठ किसी ने फैलाया
है सच के हाथ गिलोल। मत बोल।।
शरणागत को वो आहत को
दरवाजा देगा खोल। मत बोल।।
सबकी आंखों में आँसू हैं
क्या अब भी शेष किलोल? मत बोल।।
*+रमेशराज*
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