तेवरी-
जिनको वर्णों का ज्ञान नहीं
वे *नसल नसल*, *ताराज*। हैं आज।।
हंसों की पदवी जिन्हें मिली
सारे के सारे बाज़। हैं आज।।
जिनको बोले तू औषधियां
वे बनें कोढ़ में खाज। हैं आज।।
अब सन्त न सदगुरु है कोई
छिनरे लम्पट लफ़्फ़ाज। हैं आज।।
क्यों मान रहा तू जनसेवक
सब सत्ता की आवाज़। हैं आज।।
#रमेशराज
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