तेवरी...
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हर कोई आहत मिलता है
दर्दों में जड़वत मिलता, मन का फूल नहीं खिलता।
नवयुवकों के अहंकार में
एक महाभारत मिलता, मन का फूल नहीं खिलता।
कुंठा जलन घुटन सिसकन का
अब खुशियों को खत मिलता, मन का फूल नहीं खिलता।
अभिवादन को खड़ी तल्खियाँ
पीड़ा का स्वागत मिलता, मन का फूल नहीं खिलता।
अब तो स्वाभिमान का किस्सा
धन के आगे नत मिलता, मन का फूल नहीं खिलता।
+रमेशराज
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