तेवरी-
किसी ने चोट पहुँचायी
कभी जो आँख भर आयी तो हमने तेवरी लिख दी।
घने संघर्ष के दौरां
जि़न्दगी जब भी मुस्कायी तो हमने तेवरी लिख दी।
निर्वसन देखकर अबला
किसी के मन ग़ज़ल भायी तो हमने तेवरी लिख दी।
बहू ससुराल में आकर
सिसकती रोती जब पायी तो हमने तेवरी लिख दी।
किसी बीमार सूरज से
धूप अनुबन्ध कर आयी तो हमने तेवरी लिख दी।
+रमेशराज
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