तेवरी -
मन पर रख पत्थर कोने में
रोये अक्सर कोने में |
महफिल-महफिल सभी हँसे पर
नैन गये भर कोने में।
चुपके-चुपके शीलभंग है
बल इज्जत पर कोने में।
एक अनैतिक गर्भधारिणी
जख्मों से तर कोने में, ।
अक्सर कुछ आहत सोचों की
छलकी गागर कोने में।
+रमेशराज
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