तेवरी -
चिन्तन में सब आज महान
कड़वे को बोलें मिष्ठान। क्या कहने!!
अजब जागरण का ये दौर
सब सोये हैं चादर तान । क्या कहने!!
जगा दिया उसने विश्वास
उगे हुए मरुथल में धान । क्या कहने!!
सच की निकल रही है चीख़
लोग बोलते-"मीठा गान" । क्या कहने!!
आज रचाया उसने ब्याह
जिसको बोली ' भाईजान'। क्या कहने!!
*रमेशराज
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