JNV Class 6 Entrance Exam 2026 Jawahar Navodaya Vidyalaya 15 Practice Sets with Solved Papers Book In Hindi
(0)
₹
325
₹ 260 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
JNV कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा 2026: 15 अभ्यास सेट्स हल प्रश्न पत्रों सहित (हिंदी माध्यम) पुस्तक उन छात्रों के लिए आदर्श है जो जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में कक्षा 6 में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहे हैं। पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ: पुस्तक में 15 पूर्ण अभ्यास सेट्स शामिल हैं, जो छात्रों को परीक्षा के वास्तविक अनुभव से परिचित कराते हैं। पिछले वर्षों के हल प्रश्न पत्रों का समावेश, जिससे छात्रों को प्रश्नों के प्रकार और उत्तरों की समझ होती है। मानसिक योग्यता परीक्षण (Mental Ability Test) अंकगणित परीक्षण (Arithmetic Test) भाषा परीक्षण (Language Test)"
Read moreAbout the Book
JNV कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा 2026: 15 अभ्यास सेट्स हल प्रश्न पत्रों सहित (हिंदी माध्यम) पुस्तक उन छात्रों के लिए आदर्श है जो जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में कक्षा 6 में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहे हैं।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
पुस्तक में 15 पूर्ण अभ्यास सेट्स शामिल हैं, जो छात्रों को परीक्षा के वास्तविक अनुभव से परिचित कराते हैं।
पिछले वर्षों के हल प्रश्न पत्रों का समावेश, जिससे छात्रों को प्रश्नों के प्रकार और उत्तरों की समझ होती है।
मानसिक योग्यता परीक्षण (Mental Ability Test)
अंकगणित परीक्षण (Arithmetic Test)
भाषा परीक्षण (Language Test)"
Book Details
-
ISBN9788197094668
-
Pages195
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pratham Purush
- Author Name:
Virendra Mullick
- Book Type:

- Description:
अग्नि पीढ़ीक स्तम्भ कवि वीरेन्द्र मल्लिक अपन काव्यालोचना पोथी 'प्रथम पुरुष' मे गंभीर अध्येताक रूप मे सोझाँ अबैत छथि। बहुधंधी मल्लिकजी कवि, आलोचक, संपादक आ रंगकर्मी रहलाह अछि। ई पोथी हुनकर आलोचकक रूप केँ आर बेसी देखार करैत अछि। पोथी अद्भुत अछि। ओकर कालखंड प्राय: आठ सय बर्खक। मिथिला मे एहि अवधि मे रचल अनेकानेक प्रकारक काव्यक चर्च ओ एहि पोथी मे करैत छथि। मिथिलाक वैष्णव काव्य धारा केँ एक टा पुरातत्वशास्त्री जकाँ उत्खनित करैत ओ मैथिली साहित्यक इतिहास मे एक टा सार्थक हस्तक्षेप करैत छथि। मैथिलीक रामकाव्य, खास क' दुनू रामायणक विषय मे दू टा उपयोगी लेख छै जे मैथिली रामायण सभ केँ व्यापक रामकथाक परम्परा मे अवस्थित करैत ओकर विश्लेषण करैत अछि। सुभद्रा हरणक बिम्बविधानक चर्चा करैत एक टा आलेख एहि हेरायल जाइत पोथीक सौष्ठवक वर्णन करैत ओकरा समकालीन चेतना मे अनैत अछि। मैथिलीक महत्त्वपूर्ण कवि जीवकांतक कविता पर लिखल लेख हुनक काव्य केँ बुझबा मे, ओकर तह मे पहुँचÓ मे मदति करत। पोथीक पहिल आलेख एक टा सैद्धांतिक लेख अछि जकरा पढ़ला सँ कविता बूझ' मे तँ मदति भेटबे करतै, संगहि पछिला एक सय पचीस बरखक मैथिली कविताक आलोचनात्मक इतिहास सेहो। समकालीन कविता पर लिखल लेख एहि प्रकल्प केँ आर गँहीर करैत अछि। पोथी पढ़निहार लोकनि मल्लिकजीक अध्ययनक विस्तृत फलक-वेद सँ ल'क' लेनिन आ साहित्य आलोचनाक मनीषी सब धरि, हुनकर फडि़च्छ आलोचकीय दृष्टि आ हुनकर जनपक्षधरता सँ जनमल स्निग्धता सँ ओतबे प्रभावित हेताह जतेक हम भेलहुँ अछि, से आशा अछि। मैथिली कविताक मादे एक टा तथ्यगत, इतिहास सम्मत आ फडि़च्छ पोथी जँ पढ़' चाही, तँ ई पोथी पढ़ी। —विद्यानंद झा
Bible Ki Kahaniyan
- Author Name:
John Wilson
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक में ईसामसीह के जन्म तथा उनसे संबंधित कथाएँ संकलित हैं। कथाओं को सरल भाषा तथा चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि पाठकों को कथाएँ सरल एवं रोचक लगें।
DaduDayal Aur Hamara Samay "दादूदयाल और हमारा समय" Book in Hindi | Nand Kishore Pandey
- Author Name:
Nand Kishore Pandey
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mrigtrishna
- Author Name:
Sudha Murty
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Main Dayananda Saraswati Bol Raha Hoon
- Author Name:
Shri Rajasvi
- Book Type:

- Description:
स्वामी दयानंद सरस्वती का वास्तविक नाम मूलशंकर था। उनका जन्म धार्मिक विचारों के सुसंस्कृत परिवार में हुआ था। सन् 1846 में केवल 22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना घर-परिवार त्याग दिया था। इसके बाद उन्होंने संन्यास ग्रहण कर स्वामी विरजानंद की छत्रच्छाया में शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की । स्वामी दयानंद सरस्वती ने हिंदू धर्म में व्याप्त अनेक कुरीतियों को दूर करने के लिए गंभीर प्रयास किए। वे एकेश्वरवाद के प्रबल समर्थक थे और इसका उन्होंने बढ़-चढ़कर प्रचार-प्रसार भी किया। वेद उनकी प्रेरणा थे। उन्होंने लोगों को वेदों की महत्ता का ज्ञान कराते हुए उन्हें फिर से वेदों के अध्ययन-चिंतन की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि पुराण ईश्वर-प्रदत्त ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि वेद हैं । उन्होंने यह भी प्रमाणित किया कि उपनिषद् और पुराण जैसे धर्मशास्त्र ऋषि-प्रदत्त हैं, लेकिन वे सभी वेदों पर ही निर्भर हैं और उनकी मान्यता भी तभी तक है, जब तक वे वेदानुकूल हैं। ऐसे धर्मरक्षक पावन संत स्वामी दयानंद सरस्वती के अनमोल वचन इस संकलन में प्रस्तुत हैं, जो पाठक को धर्म, दर्शन, अध्यात्म, कर्म और मानव-मूल्यों की गहरी समझ देंगे।
Swami Vivekanand : Prasiddh Darshnik, Anjaan Kavi
- Author Name:
Radhika Nagrath
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Nehru Banam Subhash
- Author Name:
Rudrangshu Mukherjee
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
BPSC Main Paper-1 (General Studies) Samanya Adhyayan For 70th BPSC Mains Examination With Latest Important Practice Questions
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
A Doctors Story of Life & Death
- Author Name:
Dr. Kakarla Subbarao +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
An Odyssey Through The Dark
- Author Name:
Rehan Raza
- Book Type:

- Description:
A flourishing career, a passionate love affair and a lasting friendship come in the way of an unforgiving disaster. What ensues is a desperate attempt to hold onto the pieces that are falling apart. The pandemic not just ravaged the lives of millions of people but also bolstered the feelings of love, friendship and brotherhood in its wake. When the world was collapsing under COVID-19, a group of youngsters was busy salvaging humanity. While the Delhiites were adrift on the second wave, the heroic efforts of Rahul, a small-town boy, and Aditi, a gorgeous, affluent and qualified doctor with a benevolent heart, together with the support of the district administration’s office proved that not all heroes wear capes. But are these heroes ready to pay the price for providing succour to others? Will they be magnanimous enough to let go of their own dreams, aspirations and even their life as they devote their time and resources to provide relief to strangers? Will their love tide over the unforgiving disaster that has gripped the world?
Trilochan Rachanawali Vol. 1-4
- Author Name:
Trilochan
- Book Type:

- Description:
जनसाधारण की दुख-प्रसूत स्थानिक संवेदना को कविता में ढालकर मनुष्यता की सार्वभौमिक चेतना से जोड़ने वाले, शास्त्र की सटीकता और जनजीवन के नित नवीन अनुभवों को कई-कई छन्दों में अंकित करनेवाले विद्वान कवि त्रिलोचन हिन्दी के विराट कविता-लोक में अपनी तरह के अनूठे हस्ताक्षर हैं।
कई भाषाओं के ज्ञाता, संस्कृत के विद्वान और प्रगतिशील चेतना से सम्पन्न कवि त्रिलोचन ने रोला और बरवै जैसे प्राचीन छन्दों को भी साधा, गीत-ग़ज़ल भी लिखे और 'सॉनेट' जैसे विदेशी छन्द को हिन्दी का अपना बना दिया। मुक्त-छन्द भी लिखा और 'गद्य-वद्य' लिखते हुए आलोचना को भी एक आत्मीय रंग दिया।
यह त्रिलोचन की रचनावली है, जिसकी ज़रूरत लम्बे समय से महसूस की जा रही थी। त्रिलोचन महज़ एक कवि नहीं, कविता के विद्यालय थे; मौज़ूदा और आनेवाले रचनाकार उनसे हमेशा ही सीख सकते हैं। प्रस्तुत रचनावली में त्रिलोचन का सम्पूर्ण संकलित है।
कविताओं के साथ-साथ त्रिलोचन ने आलोचनात्मक गद्य भी लिखा। इस खंड में उनके द्वारा लिखित आलोचनात्मक लेखों, समीक्षाओं आदि को लिया गया है। कविता हो या गद्य उन्होंने बोलचाल की भाषा को ही प्राथमिकता दी। यह इन आलेखों से भी ज़ाहिर होता है। कुछ अप्रकाशित लेख भी यहाँ प्रस्तुत हैं। साथ में उनकी दैनन्दिनी भी।
Thakkar Bapa
- Author Name:
Sweta Parmar "Nikki"
- Book Type:

- Description:
‘ठक्कर बापा’ अद्भुत व्यक्तित्व के स्वामी थे। लोगों का कहना था कि वे अपने आप में एक संस्था थे। वे जिस युग में थे, वहाँ समाज के दुर्बल अंग की उपेक्षा की जा रही थी; तब बापा ने दलितों और पिछड़े वर्ग को साथ लेकर प्रगति का रास्ता पकड़ा। उनकी अडिग लोक-सेवा ने हर दीन-दुःखी और गरीब को सम्मान दिया और उन्हें सबका बापा बना दिया। राष्ट्रपिता बापू भी उन्हें बापा ही कहा करते थे। अपने जीवन के अंतिम क्षण तक जिस अपूर्व निष्ठा, अनन्य भक्ति व अथक परिश्रम से उन्होंने अपना सेवा-व्रत निभाया, वह निस्संदेह बेजोड़ कहा जा सकता है। बापा विनम्रता और सरलता की मूरत थे; जब काका कालेलकर ने उनसे लेखन के लिए कहा तो वे बोले, ‘‘मेरे जीवन में ऐसा कुछ नहीं है, जो लिखने लायक हो।’’ उन्हें भाषण देना नहीं आता था और न ही वे साहित्यिक भाषा में लेख लिखते थे, बस उन्हें डायरी लिखने का शौक था। मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानकर शोषित-उपेक्षितों के कल्याण और सुख के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करनेवाले सेवाव्रती कर्मयोगी ठक्कर बापा की प्रेरक-पठनीय जीवनी है यह पुस्तक।
Thake Paon Se Barah Kos (Stories)
- Author Name:
Neeraj Neer
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Safalta Ke 400 Sootra
- Author Name:
Y. Sunder Rajan
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
BHARAT KE MANDIR
- Author Name:
SHYAM CHANDRA
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Ve Jab Yaad Aye
- Author Name:
Ramdeo Singh
- Book Type:

- Description:
Memoirs
KUCHH TO HAI TUMSE RABTA
- Author Name:
Preeti Shenoy
- Book Type:

- Description:
This Book Doesn't have Description
Dastan-E-Pakistan : Jinnah Se Jihad Tak | The Country Is Writing The Story of Its Own Destruction
- Author Name:
Balbir Dutt
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Peer Purani Mat Rakhna
- Author Name:
Vishala Joravar Singh
- Book Type:

- Description:
Book
Kantha
- Author Name:
Shyam Bihari 'Shyamal'
- Book Type:

- Description:
मूर्धन्य साहित्यकार जयशंकर प्रसाद का साहित्य सर्वसुलभ है लेकिन उनके ‘तुमुल कोलाहल’ भरे जीवन की कहानी से दुनिया अब तक प्रायः अपरिचित रही है। ऐसे में, प्रसाद के महाप्रयाण के आठ दशक बाद उनकी जीवन-कथा को पहली बार पूरे विस्तार से प्रस्तुत करनेवाले उपन्यास ‘कंथा’ का महत्त्व स्वयंसिद्ध है।
सुपरिचित कथाकार श्याम बिहारी श्यामल ने अपनी इस कृति में प्रसाद का जीवन-चित्र तो आँका ही है, बीसवीं सदी के आरम्भिक दौर के उस पूरे परिदृश्य को उसके सम्पूर्ण रूप-गुण, राग-रंग और घात-प्रतिघातों के साथ साकार कर दिया है, जिसमें प्रसाद का कृती-व्यक्तित्व विकसित हुआ था।
श्यामल ने इस उपन्यास में प्रसाद के युग का जो चित्र उकेरा है, उसमें मदन मोहन मालवीय, महावीरप्रसाद द्विवेदी, प्रेमचन्द, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, शिवपूजन सहाय, महादेवी वर्मा, रामचन्द्र शुक्ल, केशव प्रसाद मिश्र, रायकृष्ण दास, विनोदशंकर व्यास, कृष्णदेव प्रसाद गौड़ आदि अनेक विभूतियों को कथा-चरित्र के रूप में सक्रिय देखना पाठक के लिए अविस्मरणीय अनुभव होगा।
प्रसाद के युग को रचने के लिए इस उपन्यास में लेखक ने जिस भाषा और दृश्यबद्ध शैली को गढ़ा है, वह न सिर्फ़ उसकी विशिष्ट रचनाशीलता का प्रमाण है, बल्कि पाठकों को भी विरल अनुभव प्रदान करनेवाला है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book